Chhath Puja 2021: आज दिया जाएगा डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य, जानें महापर्व छठ पूजा की विधि और महत्वChhath Puja 2021: आज यानि बुधवार को महापर्व छठ का तीसरा दिन है। इस दिन भगवान सूर्य को पहला संध्या अर्घ्य दिया जाएगा। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन छठ पर्व मनाया जाता है। इस साल ये पावन पर्व 8 नवंबर से शुरू हुआ था। सोमवार को नहाय खाय और मंगलवार को खरना मनाया गया। अब बुधवार को डूबते और गुरुवार उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। बता दें कि छठ पर्व पूरी तरह प्रकृति को समर्पित है और इसमें सूर्य और छठी मईया की उपासना का खास महत्व है। मान्यता के मुताबिक छत व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही संतान की आयु लंबी और स्वास्थ्य के लिए भी छठ पूजा किया जाता है। छठ का व्रत महिला और पुरुष दोनों कर सकते हैं। इसमें 36 घंटे का निर्जला उपवास रखा जाता है। छठ पूजा मुख्य तौर पर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में मनाया जाता है। हालांकि बिहारी और पूर्वांचली लोगों की जनसंख्या अधिक होने के कारण अब दिल्ली,मुंबई और बंगाल में भी छठ पूजा धूमधाम से मनाया जाता है। इसके लिए राज्य सरकारें खास व्यवस्था भी करती है। जैसे नदी और घाटों की साफ सफाई और अन्य तैयारियां। छठ पूजा छठ के दिन सुबह स्नान कर के साफ सुथरे वस्त्र धारण कर लें और व्रत संकल्प लें. छठ का व्रत निर्जला रखा जाता है।सूर्यास्त के बाद दूसरे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर और सभी में प्रसाद वितरण करने के बाद व्रत खोला जाता है। सूर्य को अर्घ्य देते समय सभी प्रसाद सूप में रखें और सूप में ही दीपक जलाएं। अब जल में खड़े होकर भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दें। छठी मईया और सूर्य देवता से परिवार की सुख समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करें। छठ पूजा सामग्री पानी वाला हरा नारियल, सूप, अदरक-हल्दी का पौधा, नींबू, शरीफा, शकरकंदी, पत्ते लगे गन्ने, नाशपाती, केला, ठेकुआ, चावल आटे का लड्डू, कुमकुम, चंदन, सुथनी, पान, सुपारी, शहद, अगरबत्ती, धूप बत्ती, दीपक, दीया, तेल, कपूर, बांस की दो बड़ी टोकरी, नए वस्त्र साड़ी या सूट, साफ धोती या लाल कपड़ा, जल वाला लोटा, दूध, मूली, गेंहू , चावल , सुथनी, अरता के पत्‍ता, सुपारी, पान का पत्ता, मिट्टी या पीतल का कलश, ठेकुआ।

 Chhath Puja 2021: आज यानि बुधवार को महापर्व छठ का तीसरा दिन है। इस दिन भगवान सूर्य को पहला संध्या अर्घ्य दिया जाएगा। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन छठ पर्व मनाया जाता है। इस साल ये पावन पर्व 8 नवंबर से शुरू हुआ था। सोमवार को नहाय खाय और मंगलवार को खरना मनाया गया। अब बुधवार को डूबते और गुरुवार उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। बता दें कि छठ पर्व पूरी तरह प्रकृति को समर्पित है और इसमें सूर्य और छठी मईया की उपासना का खास महत्व है। मान्यता के मुताबिक छत व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही संतान की आयु लंबी और स्वास्थ्य के लिए भी छठ पूजा किया जाता है। छठ का व्रत महिला और पुरुष दोनों कर सकते हैं। इसमें 36 घंटे का निर्जला उपवास रखा जाता है। 



छठ पूजा मुख्य तौर पर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में मनाया जाता है। हालांकि बिहारी और पूर्वांचली लोगों की जनसंख्या अधिक होने के कारण अब दिल्ली,मुंबई और बंगाल में भी छठ पूजा धूमधाम से मनाया जाता है। इसके लिए राज्य सरकारें खास व्यवस्था भी करती है। जैसे नदी और घाटों की साफ सफाई और अन्य तैयारियां। 


छठ पूजा



छठ के दिन सुबह स्नान कर के साफ सुथरे वस्त्र धारण कर लें और व्रत संकल्प लें. छठ का व्रत निर्जला रखा जाता है।सूर्यास्त के बाद दूसरे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर और सभी में प्रसाद वितरण करने के बाद व्रत खोला जाता है। सूर्य को अर्घ्य देते समय सभी प्रसाद सूप में रखें और सूप में ही दीपक जलाएं। अब जल में खड़े होकर भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दें। छठी मईया और सूर्य देवता से परिवार की सुख समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करें।


छठ पूजा सामग्री 


पानी वाला हरा नारियल, सूप, अदरक-हल्दी का पौधा, नींबू, शरीफा, शकरकंदी, पत्ते लगे गन्ने, नाशपाती, केला, ठेकुआ, चावल आटे का लड्डू, कुमकुम, चंदन, सुथनी, पान, सुपारी, शहद, अगरबत्ती, धूप बत्ती, दीपक, दीया, तेल, कपूर, बांस की दो बड़ी टोकरी, नए वस्त्र साड़ी या सूट, साफ धोती या लाल कपड़ा, जल वाला लोटा, दूध, मूली, गेंहू , चावल , सुथनी, अरता के पत्‍ता, सुपारी, पान का पत्ता, मिट्टी या पीतल का कलश, ठेकुआ।

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